जीवन के पिछले अनुभव से लाभ उठाएं
- Acharya Lokendra
- 19 जुल॰ 2021
- 3 मिनट पठन
अपडेट करने की तारीख: 27 जून 2022
जीवन के पिछले अनुभव से लाभ उठाएं, और आने वाले समय में उत्तम रीति से जिएं।
संसार में कोई भी मनुष्य सर्वज्ञ नहीं है, सभी लोग अल्पज्ञ हैं। इसलिए सभी लोगों से कहीं न कहीं, छोटी, बड़ी, जाने अनजाने, कुछ न कुछ गलतियां होती ही रहती हैं।
संसार में तीन प्रकार के लोग हैं।
पहले -- जो अपनी पिछली गलतियों से सीखते हैं, और अगली बार वे उसी गलती को दोबारा नहीं करते। एक गलती को एक ही बार करते हैैं, और उससे शिक्षा प्राप्त कर के शीघ्र ही उस गलती का सुधार कर लेते हैं। इतना ही नहीं, वे लोग दूसरों की गलतियों को देखकर भी सीख लेते हैं। कि इस व्यक्ति ने यह गलती की, मैं ऐसी गलती नहीं करूंगा। अन्यथा मुझे भी इसकी तरह से ही दुखी होना पड़ेगा। यह सोचकर वे लोग दूसरे लोगों की गलतियों से भी बहुत कुछ सीख लेते हैं। इस प्रकार से वे, बहुत सारी गलतियां करने से बच जाते हैं। ऐसे लोग थोड़े ही समय में विशेष प्रगति कर जाते हैं, और खूब आनंद से जीवन को जीते हैं। इस प्रकार के लोग विशेष बुद्धिमान कहलाते हैं।
दूसरे प्रकार के लोग -- गलती करते हैं। उसको कुछ समय के बाद समझते हैं, समझने के बाद, अपनी गलती को स्वीकार भी कर लेते हैं। थोड़ा थोड़ा उससे शिक्षा भी लेते हैं, और एक ही गलती को दो बार, चार बार भी करते हैं। फिर उस गलती को पांचवीं छठी बार आगे नहीं करते। ऐसे लोग मध्यम स्तर के कहलाते हैं।
तीसरे प्रकार के लोग -- एक ही गलती को बार-बार करते हैं। वे उस गलती को गलती मानते ही नहीं। उनको गलती समझ में ही नहीं आती। यहां तक कि समझाने पर भी नहीं समझते । ये लोग बार-बार गलतियां करते हैं। खूब गलतियां करते हैं। कुछ-कुछ गलतियां वे थोड़ी मात्रा में समझ भी लेते हैं, फिर भी नहीं छोड़ते, और जानबूझकर आगे भी गलतियां करते रहते हैं। ऐसे लोग हठी मूर्ख दुरभिमानी और मंदबुद्धि कहलाते हैं।
ये तीसरे प्रकार के लोग गलतियों मे ही पूरा जीवन जीते हैं, और उनका बहुत-सा दंड भी भोगते रहते हैं। दंड भोगने पर भी उनका सुधार बहुत कम मात्रा में हो पाता है। क्योंकि बुद्धि की कमी के कारण वे लोग अधिक सुधार न करना चाहते हैं, और न ही उसके लिए कोई विशेष प्रयत्न करते हैं।
व्यक्ति अल्पज्ञ है, इस कारण से गलतियां हो जाती हैं, कोई बात नहीं, यह तो स्वाभाविक है। परंतु उन पर चिंतन विचार परीक्षण आत्मनिरीक्षण अवश्य करना चाहिए। अपनी गलतियां स्वयं ढूंढने में परिश्रम ज़रूर करना चाहिए। जीवन तो बीतता जाता है। समय तो कभी रुकता नहीं। जो व्यक्ति इस शैली से अपना जीवन जीता है, वह धीरे-धीरे ऊपर बताए प्रथम प्रकार के लोगों में सम्मिलित हो जाता है, अर्थात विशेष बुद्धिमान बन जाता है।
जो व्यक्ति इस प्रकार से आत्मनिरीक्षण नहीं करता, अपनी गलतियों का स्वयं परीक्षण नहीं करता, उसे वर्षों तक तो क्या, जीवन भर भी कुछ विशेष समझ में नहीं आता, और उसकी कोई उन्नतिविशेष नहीं हो पाती। वह दूसरे या तीसरे स्तर पर ही जीवन को जी पाता है।
बुद्धिमान ऋषियों मुनियों का संदेश यह है, कि बीते हुए जीवन की घटनाओं से शिक्षा लेवें, इससे आपका अनुभव बढ़ेगा। आपको जीवन क्या और कैसा है, यह समझ में आएगा। और जीवन को समझ कर उस अनुभव के आधार पर, यदि आप जीवन को जीएंगे, तो आगे का बचा हुआ जीवन, आनंद से जीने का बहुत अच्छा अवसर मिलेगा।
तो इस उक्त शैली से जीवन को जीते हुए, आप भी अपना परीक्षण कर लीजिए, कि आप ऊपर बताए तीनो में से कौन से स्तर पर आते हैं? सबसे अच्छा स्तर तो वही है, जो पहले नंबर पर बताया था। पिछली गलतियों से सीखें, और आगे का जीवन उस पिछले अनुभव के आधार पर जिएं। आपका जीवन सुखमय होगा।

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